केवलादेव में विरल रूप से दिखी लाल मूँछ वाली बुलबुल
भले ही केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान इन दिनों पानी की कमी से जूझ रहा हो, किंतु ऐसे समय में लाल मूँछ वाली बुलबुल (Red-whiskered Bulbul – Pycnonotus jocosus) का दिखाई देना पक्षी प्रेमियों और प्रकृतिविदों के लिए सुखद समाचार है।
एशिया की मूल निवासी यह आकर्षक बुलबुल सामान्यतः समुद्र तल से लगभग 500 से 2000 मीटर की ऊँचाई वाले पहाड़ी, नम एवं सदाबहार वनों, बाग-बगीचों और झाड़ीदार क्षेत्रों में पाई जाती है। जबकि भरतपुर मात्र 183 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है, ऐसे में इसका केवलादेव में दिखाई देना विशेष महत्व रखता है।
जामुन, बेर, पीलू, चिरमोटी तथा अन्य फलों, फूलों की कलियों और कीट-पतंगों का भोजन करने वाली यह बुलबुल स्वभाव से फुर्तीली एवं आक्रामक होती है। इसके गालों पर मौजूद लाल धब्बा (मूँछ), काली नुकीली कलगी तथा सफेद गाल इसे केवलादेव में सामान्यतः मिलने वाली लाल गर्दन वाली बुलबुल और सफेद गालों वाली बुलबुल से सहज ही अलग पहचान देते हैं।
यद्यपि केवलादेव की पक्षी सूची में यह तीसरी बुलबुल प्रजाति के रूप में दर्ज है, फिर भी इसके दर्शन वर्षों में कभी-कभार ही होते हैं। आज इस प्रजाति को वरिष्ठ पक्षी विशेषज्ञ एवं वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफर दाऊ दयाल (डी. डी.) शर्मा द्वारा उद्यान के ‘एल’ ब्लॉक में दर्ज किया गया।
अपनी सुंदरता के साथ-साथ यह पक्षी पारिस्थितिकी तंत्र के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। फलों के बीज इसके पाचन तंत्र से होकर निकलने के बाद अधिक अच्छी तरह अंकुरित होते हैं, जिससे प्राकृतिक रूप से नए पौधों के उगने में सहायता मिलती है। साथ ही यह अनेक कीटों का भी भक्षण करती है, जिससे प्राकृतिक कीट नियंत्रण में योगदान मिलता है। इस प्रकार यह जैव विविधता, वनों के पुनर्जनन तथा स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
केवलादेव में इस प्रजाति के पुनः दर्ज होने से पक्षी प्रेमियों, प्रकृतिविदों, रिक्शा गाइडों, वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफरों, उद्यान प्रशासन तथा पर्यटन व्यवसाय से जुड़े लोगों में उत्साह का माहौल है।
📷 फोटो एवं जानकारी:
दाऊ दयाल (डी. डी.) शर्मा
वरिष्ठ पक्षी विशेषज्ञ एवं वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफर


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