ये सोना बटर किस देश की चिड़िया है भई !!!

(भरतपुर की bird sanctuary में सोना बटर के आगमन की सूचना मिली तो मैने सोचा कि जब अपने पास दाऊ दयाल शर्मा जी जैसे प्रख्यात पक्षी विशेषज्ञ मित्र के रूप में मौजूद हैं तो क्यों न उनसे कुछ जानकारी ली जाए!  तो लीजिए, शर्मा जी से हुई बातचीत आपके लिए प्रस्तुत है! )

नमस्कार शर्मा जी!  सुना है कि पक्षी जगत में एथलीट के नाम से जाने जाने वाले पक्षी उत्तरी ध्रुव के आसपास से चल कर आपके भरतपुर में आने लगे हैं!  इनके बारे में जानने की उत्सुकता है!  कुछ बताइए ना इनके बारे में!  इस साल भी आपकी इनसे मुलाकात हुई है या नहीं?

दाऊ दयाल शर्मा (डीडी) – नमस्कार सुशांत जी!   आप पैसिफिक गोल्डन प्लोवर (Pacific Golden Plover) का जिक्र कर रहे हैं ना?  हिंदी में इसे अक्सर ‘सोना बटर’ या ‘छोटा सोना बटर’ भी कहा जाता है! 

यह सचमुच प्रकृति का चमत्कार ही है कि उत्तरी ध्रुव के आसपास (साइबेरिया से अलास्का तक)  रहने वाला ये सोना बटर, सर्दियों में भोजन की तलाश में भारत और आसपास के अन्य देशों में आता है!
 
क्या आप विश्वास कर सकेंगे कि 3,000 से 4,500 किमी की उड़ान बिना रुके, बिना थके, बिना लंच, ब्रेकफास्ट या डिनर लिए, यानि नॉन स्टॉप फ्लाइट लेकर 60 से 80 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ता हुआ भारत समेत दक्षिण एशिया के देशों में आता है?  इसीलिए इसे पक्षी जगत का एथलीट माना जाता है! 

सुशांत – बाप रे!  लगभग 4000 किमी की यात्रा में ये न सोता है, न अपने लिए fuel stop के लिए धरती पर उतरता है?

डीडी –  यह सच में ही किसी चमत्कार से कम नहीं है!  बताया जाता है कि फ्लाइट की तैयारी और planning के दौरान ये अपने शरीर में काफी सारी वसा एकत्र करता है और यही वसा (fat)  इसके लिए इस यात्रा में ईंधन का काम करती है! 

और एक बात बताऊं आपको?  मादा plover पक्षी के लिए तो हमारा भरतपुर एक मैटरनिटी होम ही है! सर्दी के मौसम में ये यहां पर कुछ महीने के लिए आती हैं, अंडे देती हैं, उनको सेती हैं, उड़ना सिखाती हैं और इन भारतीय नागरिकों को अपने साथ लेकर फुर्र हो जाती हैं!  न इनको पासपोर्ट चाहिए होता है, न वीज़ा और नहीं OCI.  वाह क्या मस्त लाइफ़ है! 

सुशांत – पर ये भरतपुर में क्यों आती हैं?  यहां इनके लिए क्या आकर्षण मौजूद हैं?

डीडी – हमारे देश का अतिथि सत्कार और भोजन तो विश्व भर में प्रसिद्ध है! सोना बटर पेड़ों में या पानी में नहीं रहते!  इनका निवास स्थान दलदल, कीचड़, नदी के मुहाने, वैटलैंड होते हैं! ये  मुख्य रूप से मांसाहारी (Insectivorous/Carnivororous जीव हैं। इसके भोजन में छोटे कीड़े-मकोड़े (कीट, भृंग/Beetles, चींटियाँ)  केंकड़े, झींगे और छोटे घोंघे (Mollusks & Crustaceans) समुद्री और मिट्टी के कीड़े (Worms) आदि मुख्य हैं!  जब कभी इनको शाकाहारी भोजन की इच्छा होती है तो कभी-कभी यह जामुन (Berries) और बीज भी खा लेते हैं!

अब बात रही भरतपुर की!  यहां हमारे पास केवलादेव नेशनल पार्क मौजूद है जिसमें काफी बड़ा वैटलैंड (दलदली / आद्र भूमि) उपलब्ध है!   यहां इन पक्षियों को आवास और भोजन भरपूर मात्रा में उपलब्ध है!  Bird sanctuary होने के कारण यहां इनको सुरक्षित वातावरण भी उपलब्ध है!  सर्दियों का मौसम भी इनके स्वभाव के अनुकूल है!

सुशांत – वैसे इनको कैसे पहचाना जा सकता है? 

डीडी – यह मध्यम आकार का तटवर्ती पक्षी (Shorebird) है, जिसकी लंबाई लगभग 23 से 26 सेमी और पंखों का फैलाव (Wingspan) 60 से 70 सेमी होता है।  मतलब ये कि इसकी अपनी लंबाई से दुगने से भी अधिक बड़े इसके पंख होते हैं जो इसकी लंबी उड़ान क्षमता का रहस्य है!

प्रजनन काल का रूप (Breeding Plumage): गर्मियों (प्रजनन काल) में नर पक्षी का चेहरा, गला, सीना और पेट गहरा चमकदार काला हो जाता है। इस काले रंग के चारों ओर माथे से लेकर गर्दन के किनारों तक एक स्पष्ट सफेद पट्टी (White Border) होती है। इसकी पीठ और पंखों पर सुनहरे (Golden) और भूरे रंग के धब्बे होते हैं, जिससे इसे यह नाम मिला है।

गैर-प्रजनन काल का रूप (Non-breeding Plumage): सर्दियों में (जब यह भारत जैसी जगहों पर आता है) इसका काला रंग गायब हो जाता है। इसका सीना और पेट हल्का पीला-भूरा (Buffish-yellow) हो जाता है और पूरी पीठ पर सुनहरे-भूरे धब्बे बने रहते हैं।
चोंच और टांगें: इसकी चोंच छोटी, मजबूत और काली होती है। टांगें लंबी और गहरे धूसर/काले रंग की होती हैं।

सुशांत – वैसे आपका ये सोना बटर रहता कहां है?

डीडी – सोना बटर का मूल प्रजनन क्षेत्र आर्कटिक टुंड्रा (Arctic Tundra) है, जो उत्तरी एशिया (साइबेरिया) से लेकर पश्चिमी अलास्का तक फैला हुआ है। यहाँ यह खुले, दलदली और काई (Moss/Lichen) से ढके मैदानी इलाकों में घोंसला बनाता है।

जब इसके मूल निवास का तापमान शून्य से भी नीचे चला जाता है तो यह दक्षिण की ओर प्रवास करता है। यह दक्षिण एशिया (भारत, श्रीलंका), दक्षिण-पूर्व एशिया, ऑस्ट्रेलिया, प्रशांत महासागर के द्वीपों (जैसे हवाई, फिजी) और यहाँ तक कि अमेरिका के तटीय क्षेत्रों में पाया जाता है।

हमारे देश की ही बात करें तो यह सर्दियों (सितंबर से अप्रैल) के दौरान तटीय Mudflats (कीचड़दार तटों), ज्वारभाटा वाले क्षेत्रों, नदी के मुहानों, धान के खेतों और गीले घास के मैदानों में बहुतायत से देखा जा सकता है।

सुशांत – अरे वाह!  आज तो बड़ी अदभुत जानकारी मिल रही है!  इनके बारे में और क्या बताना चाहेंगे आप?

डीडी – यह “दौड़ो-रुको-देखो” (Run-Stop-Look) की रणनीति अपनाता है। यह ज़मीन पर तेज़ी से कुछ कदम दौड़ता है, अचानक रुककर शिकार को देखता है और अपनी तीखी चोंच से झपट्टा मारकर उसे पकड़ लेता है।

* सर्दियों और प्रवास के दौरान (Groups): प्रवास की उड़ान भरते समय और सर्दियों के ठिकानों पर यह अक्सर समूहों (Flocks) में रहता है। यह अन्य तटवर्ती पक्षियों के साथ मिलकर भोजन तलाशता है।

* मादा ज़मीन पर एक छोटा सा गड्ढा बनाकर उसमें सूखी घास, काई और पत्तियाँ बिछाती है।   मादा आमतौर पर 4 अंडे देती है, जो छलावरण (Camouflage) के लिए भूरे और धब्बेदार होते हैं ताकि शिकारी उन्हें देख न सकें।

* मियां बीवी  दोनों बारी-बारी से लगभग 25-28 दिनों तक अंडों को सेते हैं।  बच्चे अंडे से निकलते ही स्वतंत्र (Precocial) होते हैं और कुछ ही घंटों में खुद भोजन ढूंढने योग्य हो जाते हैं। लगभग एक महीने में वे उड़ना सीख जाते हैं।

* इनका औसत जीवन काल 4 से 8 वर्ष होता है, लेकिन अनुकूल परिस्थितियों में ये 10 से 12 वर्ष या उससे अधिक भी जीवित रह सकते हैं।

* सोना बटर पक्षी में तैरने की क्षमता नहीं होती! वजह ये कि बत्तखों (Ducks) या जलपक्षियों (Waterfowl) के विपरीत, प्लोवर के पैरों की उंगलियों के बीच तैरने के लिए झिल्ली (Webbed feet) नहीं होती है। उनके पैर जमीन पर चलने और दौड़ने के लिए बने होते हैं।

* भोजन का तरीका (Wading): ये पानी के अंदर तैरने के बजाय झीलों, तालाबों या कीचड़ वाले तटों (Mudflats) के उथले पानी और किनारे की गीली मिट्टी पर चलते हैं। ये पानी में गहरे उतरने से बचते हैं और केवल अपने पैरों या टखनों तक पानी में रहकर ही अपना भोजन तलाशते हैं।

सुशांत – आज आपसे सोना बटर, यानि पैसिफिक गोल्डेन Plover पक्षी के बारे में बड़ी रोचक और काम की जानकारी मिली!  आशा है आप आगे भी हमें ऐसी ही मजेदार जानकारी देते रहेंगे!

डीडी – जी, आपसे बातचीत का यह अवसर मेरे लिए भी बहुत सुखद रहा!  पशु पक्षियों के बारे में तो मैं घंटों तक बिना थके बातचीत करता रह सकता हूं!  आप इन सर्दियों में ऐसे प्रवासी पक्षियों से मिलने के लिए भरतपुर अवश्य आएं!  आपका हार्दिक स्वागत है!

सुशांत – जी, कार्यक्रम जल्द ही बन सके, ऐसा प्रयास करूंगा!  आपसे मिलना सदैव सुखद होता है!

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