

लो आ गए विदेशी मेहमान पक्षी भी…! 🦆🪽
जैसे ही घना की झीलें पानी से तर हुईं, वैसे ही विदेशी प्रवासी पक्षियों के आगमन की आहट भी सुनाई देने लगी। इस वर्ष केवलादेव के लिए काफी उतार-चढ़ाव भरा समय रहा है, लेकिन अब इन विदेशी मेहमानों के आगमन से उम्मीदों के पंख लग गए हैं।
आज अपनी नियमित बर्डिंग के दौरान मैं अजान बाँध पहुँचा। वहाँ हजारों की संख्या में विदेशी प्रवासी पक्षी अजान बाँध के छिछले पानी में आराम करते दिखाई दिए।
इनमें लगभग 5–6 हजार प्रवासी बत्तखों का झुंड दिखाई दिया, जिसमें पिनटेल , शोवेलर , गार्गनी और कॉमन टील जैसी प्रजातियाँ प्रमुख थीं।
इसके अलावा लगभग 800 ओरिएण्टल पार्टिनकॉल तथा सैकड़ों की संख्या में टेम्मी निक्सस्टिंट , ग्रीन सैंडपाइपर , कॉमन ग्रीनशंक , रेडशंक , वुड सैंडपाइपर , लिटिल रिंगढ़ पलवर , मार्श सैंडपाइपर और मार्श हर्रिएर भी देखे गए।
यह दृश्य केवल पक्षी प्रेमियों के लिए ही नहीं, बल्कि भरतपुर के वेटलैंड्स के लिए भी एक सुखद संकेत है।
हजारों किलोमीटर की कठिन यात्रा के बाद पहला पड़ाव
साइबेरिया और यूरोप के विभिन्न क्षेत्रों से आने वाले ये प्रवासी पक्षी हजारों किलोमीटर की यात्रा करके यहाँ पहुँचते हैं। रास्ते में बर्फीले तूफान, ऊँचे पहाड़ी दर्रे, मौसम की विपरीत परिस्थितियाँ तथा प्राकृतिक और मानवीय खतरे इनके सफर को बेहद चुनौतीपूर्ण बनाते हैं।
इतनी लंबी यात्रा के बाद अजान बाँध के छिछले पानी में इनका कुछ समय रुककर आराम करना और भोजन जुटाना इनके लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
संभावना है कि करीब एक सप्ताह आराम करने के बाद ये पक्षी आसपास के वेटलैंड्स का सर्वे करेंगे और भोजन तथा पानी की उपलब्धता के अनुसार केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान, अटलबंद वेटलैंड तथा आसपास के अन्य वेटलैंड्स में फैल जाएंगे।
केवलादेव के लिए चुनौतीपूर्ण रहा यह वर्ष
इस वर्ष केवलादेव में वर्षा की कमी रही। प्राकृतिक जलस्रोत पंचना से भी अपेक्षित पानी नहीं मिल पाया। बाद में अजान बाँध, गोवर्धन कैनाल और चम्बल से जैसे-तैसे पानी की आपूर्ति की गई।
पानी पहुँचने में हुई देरी का असर जलपक्षियों के प्रजनन पर भी पड़ा और लगभग दस प्रजातियों का प्रजनन इस बार उद्यान के बाहर हुआ।
लेकिन प्रकृति ने फिर उम्मीद जगाई।
जैसे ही पर्याप्त पानी उपलब्ध हुआ, पिछले सप्ताह पेंटेड स्टॉर्क ने केवलादेव के एल और एन ब्लॉक में अपने पुराने घोंसलों पर डेरा डालना शुरू किया। अब इन हजारों विदेशी मेहमानों के आगमन ने इस उम्मीद को और मजबूत कर दिया है कि आने वाला प्रवासी पक्षी सीजन केवलादेव और भरतपुर के लिए फिर से रौनक लेकर आएगा।
पानी आया… तो परिंदे आए।
परिंदे आए… तो उम्मीदें लौटीं। 💚🪽
अब लगता है कि इस बार प्रवासी पक्षियों के साथ भरतपुर का पर्यटन भी फिर बुलंदियों को छू सकता है।
प्रकृति को पानी मिलेगा, तो परिंदों को आसमान मिलेगा…
और परिंदे आएँगे, तो भरतपुर की पहचान और मजबूत होगी। 🌿🦆
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