पर्पल हेरोन (Ardea purpurea) आर्द्रभूमियों का एक अत्यंत कुशल शिकारी पक्षी है। इसका मुख्य भोजन मछलियाँ, मेंढक, जलसर्प (पानी के साँप), छिपकलियाँ, झींगे, कीट तथा कभी-कभी छोटे कृंतक होते हैं। लंबी गर्दन, भाले जैसी नुकीली चोंच और तीक्ष्ण दृष्टि इसे प्रकृति के सबसे प्रभावशाली शिकारियों में स्थान दिलाती है।
शिकार के दौरान यह पक्षी लंबे समय तक पूर्ण धैर्य, एकाग्रता, सजगता और स्थिरता के साथ पानी में खड़ा रहता है। जैसे ही शिकार हलचल करता है, यह बिजली की गति से अपनी गर्दन आगे बढ़ाकर सटीक वार करता है। इसकी सफलता का रहस्य धैर्यपूर्ण प्रतीक्षा और सही समय पर सटीक प्रहार में छिपा है।
इस दृश्य को कैमरे में कैद करना भी किसी साधना से कम नहीं। यह पक्षी जितनी धैर्य, सजगता, स्थिरता, फुर्ती और चौकन्नेपन के साथ अपने शिकार की प्रतीक्षा करता है, उससे कहीं अधिक एकाग्रता, धैर्य, मेहनत, सतर्कता और सही समय का इंतज़ार एक नेचर फोटोग्राफर को करना पड़ता है।
जब मैंने यह शॉट केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान में लिया, उस समय दोपहर की धूप बेहद तेज़ थी। मैं झाड़ियों की ओट में दम साधे, कैमरा ट्राइपॉड पर लगाए, उंगली शटर बटन पर टिकाए, स्वयं को पूरी तरह छिपाकर उस एक निर्णायक क्षण की प्रतीक्षा कर रहा था। कई बार मिनटों नहीं, घंटों का इंतज़ार करना पड़ता है। लेकिन जैसे ही पर्पल हेरोन ने बिजली की गति से पानी में वार किया, उसी पल कैमरे ने इस यादगार दृश्य को हमेशा के लिए कैद कर लिया। सच ही कहा गया है— “मेहनत और धैर्य से की गई प्रतीक्षा का फल सदैव मीठा होता है।”
सैकड़ों तस्वीरों में से एक-दो ऐसे शॉट ही निकल पाते हैं, जिन्हें आप सभी के साथ साझा करने का सौभाग्य मिलता है। प्रकृति हमें हर दिन यही सिखाती है कि सफलता केवल गति से नहीं, बल्कि धैर्य, सही समय और निरंतर प्रयास से मिलती है।
📷 फोटो एवं लेख: दाऊ दयाल शर्मा


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