केवलादेव में कछुओं की समृद्ध दुनिया: स्वस्थ वेटलैंड और सशक्त पारिस्थितिकी तंत्र का प्रमाण
विश्व प्रसिद्ध केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान, भरतपुर में पहली बार किए गए वैज्ञानिक कछुआ सर्वेक्षण ने इस विश्व धरोहर आर्द्रभूमि की समृद्ध जैव विविधता का नया अध्याय खोल दिया है। सर्वेक्षण में कुल 210 कछुए दर्ज किए गए, जो राजस्थान के किसी भी संरक्षित वेटलैंड के लिए अत्यंत उत्साहजनक परिणाम हैं।
सर्वेक्षण में गंगा–यमुना सॉफ्टशेल कछुओं (Indian Softshell Turtle) की 74 संख्या सर्वाधिक दर्ज की गई। इसके अतिरिक्त पूरे राजस्थान में पाई जाने वाली 10 कछुआ प्रजातियों में से 7 प्रजातियाँ केवलादेव में दर्ज हुईं। इनमें इंडियन फ्लैपशेल टर्टल (64), इंडियन रूफ्ड टर्टल (29), ब्राउन रूफ्ड टर्टल (26), इंडियन टेंट टर्टल (12), फॉर-टूड टर्टल (7) तथा रेड क्राउन रूफ्ड टर्टल (3) शामिल हैं। यह विविधता केवलादेव के समृद्ध जलीय पारिस्थितिकी तंत्र का स्पष्ट संकेत है।
विशेषज्ञों के अनुसार लगभग 350 वर्ष पूर्व यह क्षेत्र यमुना नदी के विस्तृत बेसिन का हिस्सा था, इसलिए यहाँ गंगा–यमुना बेसिन की प्रजातियों का पाया जाना स्वाभाविक है। यह ऐतिहासिक विरासत आज भी केवलादेव की जैव विविधता में परिलक्षित होती है।
कछुए किसी भी वेटलैंड के महत्वपूर्ण जैव संकेतक (Bio-indicators) माने जाते हैं। वे मृत जैविक पदार्थों को खाकर जलाशयों को स्वच्छ बनाए रखने, जलीय खाद्य श्रृंखला को संतुलित रखने तथा पारिस्थितिकी तंत्र को स्वस्थ बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जिस वेटलैंड में कछुओं की विविधता और संख्या अधिक होती है, वह बेहतर जल गुणवत्ता, समृद्ध जलीय वनस्पति और संतुलित पारिस्थितिक तंत्र का द्योतक माना जाता है।
चंबल नदी के बाद केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान राजस्थान में कछुओं के लिए एक महत्वपूर्ण आश्रय स्थल के रूप में उभर रहा है। यह सर्वेक्षण न केवल संरक्षण प्रयासों की सफलता का प्रमाण है, बल्कि भविष्य में वैज्ञानिक अनुसंधान, वेटलैंड प्रबंधन और जैव विविधता संरक्षण के लिए भी एक सशक्त आधार प्रदान करता है।
210 कछुओं और 7 प्रजातियों की यह उपस्थिति स्पष्ट संदेश देती है कि केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान आज भी एक जीवंत, स्वस्थ और समृद्ध वेटलैंड है, जिसकी प्राकृतिक धरोहर का संरक्षण आने वाली पीढ़ियों के लिए अत्यंत आवश्यक है।
केवलादेव की यह उपलब्धि केवल कछुओं की संख्या तक सीमित नहीं है, बल्कि यह इस बात का प्रमाण है कि संरक्षण, वैज्ञानिक प्रबंधन और स्वस्थ वेटलैंड मिलकर जैव विविधता को कैसे सुरक्षित रख सकते हैं। यह सर्वेक्षण भविष्य के संरक्षण प्रयासों के लिए एक प्रेरणादायक मील का पत्थर है।





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