कृष्णा नदी के मुहाने से आती हैं घोघिला (Open billed stork)

घोघिला द्वारा घोंसलों का निर्माण

मानसून पूर्व वारिश की पहली फुहार आते ही  दक्षिण भारत में कृष्णा नदी के मुहाने से आने वाले घोंघिला      ( openbilled stork) ने मलाह वेटलैंड में दस्तक दे दी है। मानसून के बाद भरतपुर में प्रजनन करने वाली सत्रह प्रजातियों में से घोंघिला सबसे पहले आता है,
सामान्यतः ये मध्य जून में आते हैं इस बार ये दो सप्ताह पहले आए हैं, यहाँ की ब्रीडिंग कॉलोनी में घोंसले सीमित हैं , इसीलिए ” पहले आओ पहले पाओ” की नीति लागू होती है , यही कारण है कि लगभग ,60-70 घोंघिलों ने न केवल अपने मचान जैसे घोंसलों पर कब्जा कर लिया , अपितु उनकी मरम्मत के लिए बबूल , यूकेलिप्टस, पीलू, जामुन जैसे वृक्षों की टहनियां का नेस्टिंग मटेरियल लाना भी शुरू कर दिया है । कुछ ने जोड़े बना कर संसर्ग भी शुरू कर दिया है।
ऐसा पहली बार हो रहा है जैसे इन्हें ब्रीडिंग की बहुत जल्दी है।
प्रकृति ने घोंघिल को अदभुद बनाया है इसे घोंघे बहुत पसंद हैं इसीलिए इसकी चोंच में गैप होता है और किनारों पर दातें जैसी रचना होती हैं जिससे बिना घोंघे के आवरण को तोड़े अंदर से जीव निकल कर खा जाता है,एक ओर मजेदार बात वयस्क की चोंच में ही गैप होता है अवयस्क के आरंभिक अवस्था में सामान्य चोंच होती है। अन्य स्टार्क की तरह ये भी कोई कॉल नहीं कर सकते, अपना संदेश देने के लिए डैनो को विशेष दिशा में हिलाते हैं तथा चोंच को बजा के आवाज निकलते हैं।
कुछ भी हो  जिस तरह तुरंत प्रभाव से घोंघिला ने ब्रीडिंग सीजन की शुरुआत की है उससे पक्षी विशेषज्ञों, छायाकारों,वन्य जीव प्रेमियों में हर्ष की लहर है।


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