हाल ही अटलबंद वेटलैंड में दुर्लभ विदेशी पक्षी स्पॉटेड रेडसैंक  मिला जो  “स्कॉलोपेसिड़े ” कुल का खूबसूरत जलपक्षी है जिसे हिंदी में  सुरमा बटन,टिमटिमा  या
चित्तिदार बटन   कहते हैं !
नारंगी टांगों, काली लाल नारंगी चोंच जिसके शरीर पर गहरी काली पृष्ठ पर स्पॉट वाली 29 से 31 सेमी लम्बाई का 61 से 67 सेमी के पंखो के फैलाव वाली चिड़िया धुर उत्तर में स्कैनडीविया और आर्किटिक में अप्रैल से सितम्बर में प्रजनन के बाद शीतकालीन प्रवास में ब्रिटिश द्वीप समूह, फ्रांस,अफ्रीका और दक्षिण एशिया में आता है, कभी कभी ऑस्ट्रेलिया और उत्तरी अमेरिका में भी देखा गया है l उड़ते हुए हवा में इसके लम्बे लाल पैर, लम्बी गर्दन और लम्बी पतली चोंच, और दो फ़ीट लम्बे डेनों से इसको पहचानना आसान होता है l
झुण्ड में मिलने वाला यह पक्षी छिछले पानी में लम्बी पतली नारंगी चोंच से  कुरेद कुरैद कर चलते चलते लम्बे लम्बे डग भरते हुए छोटे कीट, लार्वा, झीँगा, केंचुआ आदि का भोजन करने वाला ये विदेशी मेहमान जो  मायनेस 20 से 30 डिग्री में रहने वाला यहाँ के 45- 46 डिग्री में भी अटलवंद वेटलैंड में किलोल करना पक्षी विदों के लिए अत्यंत आश्चर्य और विस्मय का विषय है l  
गहरे पानी में इसे तैरते भी देखा जा सकता है l
यद्पि यह केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान में रिकॉर्डड तो है किन्तु देखे वर्षों हो गए l प्राचीन अटलबंद वेटलैंड की समृद्ध जैव विविधता, भोजन की प्रचुर उपलब्धता, सुरक्षा का वातावरण, डिस्टर्बेन्स की न्यूनता, प्राकृतिक दुश्मन (शिकारी पक्षियों )का आभाव, न्यूनतम मानवीय दखल आदि कारणों से इसकी उपस्थिति परिलाक्षित हो रही है l
ऑस्ट्रेलिया, दक्षिणी एशिया से वापिसी (बैक माइग्रेशन )
में रास्ते के ” मिडवे ” में इनके ठहराव की सम्भावना से भी इंकार नहीं किया जा सकता है l
बहरहाल! भरतपुर के लिए यह हर्ष का विषय है, जो बेहाल होते इस अटलबंद वेटलेण्ड को बचाने, सहेजने, संरक्षित करने के लिए प्रेरित करता है!
कारण…ग्लाेबल वार्मिंग के कारण एयर करंट प्रभावित—
ग्लाेबल वार्मिंग के कारण वायुमंडलीय परिवर्तन हाे रहे हैं। माइग्रेटी वर्ड जमीन से करीब डेढ़ किलाेमीटर ऊंचाई पर उड़ान भरते हैं। इस दाैरान हवा का रुख और नमी से वह प्रवासीय स्थल और मूल आवास का सफर करते हैं। विशेषज्ञाें का अनुमान है कि ग्लाेबल वार्मिंग से बर्फ तेजी से पिघल रही है। इस कारण दक्षिण से उत्तर काे बहने वाली हवा में नमी प्रभावित है। इससे पक्षियाें काे मिलने वाला एयर करंट स्लाे है अथवा प्रतिकूल है। इसलिए मई की गर्मी में भी रेडसैंक का भरतपुर में मिडवे ठहराव बढ़ गया है। यद्यपि यह शाेध का विषय है, लेकिन माना जा है कि यह कुछ दिन के ही मेहमान है। देर-सवेर अपने वतन काे लाैट जाएंगे।

चित्र – दाऊ दयाल शर्मा, भरतपुर

Discover more from Birding Coach

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Leave a Reply

Trending