
This is a troubling report regarding the environmental degradation of Rajasthan’s wetlands. Below is the transcribed text of the news report from Dainik Bhaskar (Jaipur Edition, 27-04-2026) to make it accessible for site visitors.
दैनिक भास्कर | जयपुर | 27-04-2026
भास्कर एक्सक्लूसिव: भास्कर टीम ने की प्रदेश की 27 वेटलैंड्स की पड़ताल
भरतपुर; प्राधिकरण ने वेटलैंड पर ही काट दी कॉलोनी… यहां 700 दुर्लभ परिंदे आते हैं
बोरिंग के तारों में उलझ रहे पक्षी, झील में ऐसे 2 हजार अवैध नलकूप
सांभर झील में डोंगी लेकर पहुंचे ये लोग अवैध बोरिंग से खारा पानी नमक के क्यारियों तक पहुंचाते हैं। झील में ऐसे 2 हजार से ज्यादा अवैध बोरिंग हैं। इनकी पहचान सतह पर निकले खंभों व इनसे बंधे लकड़ी के बक्सों (लाल घेरे में) से होती है। पक्षी इन खंभों या बोरिंग के तारों में उलझकर जान गंवा देते हैं। फोटो – लक्ष्मण कुमावत
विशेषज्ञों की राय
- डीडी शर्मा: पक्षी विशेषज्ञ व पर्यावरणविद्
- सेवाराम माली: प्रदेश के ‘बर्डमैन’ नाम से विख्यात
जयपुर | भरतपुर स्थित केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान में सारसों की संख्या चार दशक में 95% घट गई है। सिकुड़ती झील व खेतों में कीटनाशकों का बढ़ता उपयोग इसकी वजह है। हालांकि, प्रदेश में वेटलैंड पर संकट का यह इकलौता मामला नहीं है। भास्कर द्वारा दो विशेषज्ञों के साथ की गई पड़ताल में 10 ऐसी वेटलैंड सामने आई हैं, जो मानवीय हस्तक्षेप का खामियाजा उठा रही हैं। - भरतपुर: यहां तो वेटलैंड पर कॉलोनी काट दी है। अंतर्राष्ट्रीय महत्व वाली ‘रामसर साइट्स’ भी संकट में हैं।
- अजमेर: आनासागर नालों से दूषित हो रही है। आनासागर में 20 नालों का पानी गिर रहा है।
- आबू: नक्की झील के बफर जोन में दो मंजिला होटल बनी हुई है।
- डूंगरपुर: साबेला तालाब के आसपास मैरिज गार्डनों की रोशनी से प्रवासी पक्षियों का आना लगभग बंद हो गया है।
- सीकर: रेवासा डंपिंग यार्ड बनती जा रही है।
दुर्लभ पक्षियों का घर उजाड़ा, 700 मी. अंदर तक सड़कें बना दीं
भरतपुर में विकास प्राधिकरण द्वारा विकसित हो रही सेक्टर 13 स्कीम का एक हिस्सा वेटलैंड पर है। स्टेट वेटलैंड अथॉरिटी के रिकॉर्ड में यह 12 हेक्टेयर के ‘कस्बा भरतपुर चाक नं. 1’ वेटलैंड (क्रं. RJ002542) नाम से दर्ज है। सर्दियों में यहां साइबेरिया, सेंट्रल एशिया और यूरोप से करीब 700 दुर्लभ पक्षी आते हैं। बीडीए आयुक्त कनिष्क कटारिया के अनुसार यहां वेटलैंड होने की कोई सूचना नहीं है।
हाईटेंशन लाइन ले रही जान
2023 में 12 से अधिक कुरजां की फलोदी स्थित रामसर साइट खींचन झील आते समय 50 किमी पहले हाईटेंशन लाइन की चपेट में आने से मौत हो गई। ये हाईटेंशन लाइन अब भी वैसी ही हैं। आधे से अधिक खींचन गांव में भी बिजली के खुले तार हैं। चुग्गा घर से उड़ान भरने वाले पक्षी इनसे टकराकर मर जाते हैं।
मनीष लाखन के साथ योगेश शर्मा की रिपोर्ट।
The report highlights a critical disconnect between urban development authorities and environmental conservation records, specifically citing the construction of roads and residential sectors on protected wetland areas.

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