राधे राधे मित्रों 🙏
जैसा कि मैंने कल की पोस्ट में बताया मैं गत 45 वर्षों से वन्य जीव ,पक्षी गणना में भाग लेता आया हूं। यही नहीं मैंने केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान के अलावा रणथंभोर,सरिस्का, कॉर्बेट में भी इस तरह की गणना में भाग लिया है। वन्य जीवों के घर में रात बिताना ,उनकी शाम को इकट्ठा होके डूबते सूरज को चहचहाट से विदाई देना, धीर धीरे सूर्यास्त और संध्या में डीजे जीवों का सुरक्षित स्थान पर छुपना,रात्रि के जीव उल्लू, नाइटजार,नाइट हेरोन,की आवाज से उनके आगमन की सूचना,हिंसक जीवों शिकार के लिए निकलना ओर 8-9 बजे चांद का निकलना … वाकई मेरा मचान,हाइड या झाड़ी में बैठ सतर्क निगाहों से इन सब को निहारना,आत्मसात करना और हकीकत में उस वातावरण में हर पल को जीना एक अदभुद,रोमांचकारी अनुभव होता है।
इतने लंबे समय के वन्य जीवन अनुभव में ज़ेहन में कितने ही अनगिनत रोमांचक घटनाएं,किस्से चहलकदमी करती रहती हैं जिससे मेरा अंतर्मन सदैव प्रफुल्लित रहता है…
अब कल सुबह की घटना बताता हूं —
जैसे ही सुबह चार बजे सारे रात्रिचर अपने आवास पर लौटना शुरू कर देते हैं, चांद ओझल ओर ऊषा का आगमन होता है, मैं बारीकी से इस परिवर्तन को मंत्रमुग्ध हो आत्मसात कर रहा था,हाथ में कैमरा लिए प्रातः चहचहाट के बीच, मेरा साथी प्रातःकर्म के लिए गयाहुआ था, चुंकि हरेक वाटर पॉइंट पर दो लोग नियत होते हैं ,इसी बीच चाय की गाड़ी चाय के कप दे गई,सामने पत्थर की बेंच पर चाय के कप रखे थे, मैं किसी भी आहट के लिए स्वभावत सतर्क था,
इतने में ही एक पक्षी बेबलर या पेंगा या सेवन सिस्टर( jungle babler) चाय के कप के नजदीक फुदक के आई और चाय के कप को गौर से देखती ओर एकनजर से मुझे देखती । जबकि मैं एकदम शांत,एकाग्रचित्त इसकी हरकतों को देखते हुए कैमरे में क़ैद भी कर रहा था,
इस पक्षी के बारे में बता दूं यह रोटी,बीज,बिस्कुट,चिप्स,कीड़े,मकोड़े ,झुंठन सब खा लेती है,मानवों के साथ भी इसकी अच्छी पटती है उसी प्रकार जंगली जीवों के साथ भी खूब बनती है,स्वभाव से एग्रेसिव होती है,ओर बहुत चपल, एक्टिव होती है।
फिर इसने सावधानी से चोंच से बहुत थोड़ा सा चाय का स्पर्श किया ,चखा,जिससे इसे लगा ये चीज गर्म है। फिर पुनः सम्भल के कप के तले में टच किया शायद वहां से कुछ स्वाद मिल जाए  पर वो भी बात नहीं बनी… चिड़िया के चेहरे से लग रहा था जैसे इसकी लार टपक रही है पर बात बन नहीं रही… इसने फिर एक नजर मुझे पर डाली ,मेरी ओर से कोई प्रतिरोध न देख कर निश्चिंत हो,बड़ा ही साहसिक कदम उठाया ,सावधानी ओर धीरे से चोंच से कप को बेंच के ऊपर ही गिरा दिया अब काम बन गया …फिर मेरी और देखा,बस क्या था मेहनत सफल हुई …
लगी तेजी से चाय सुड़कने…
मुझे यह सब देखने में सचमुच बड़ा आनंद आ रहा था और मुस्करा रहा था,
तबतक मेरा साथी भी लौट आया था मैने देखा वो भी बेबलर को बिना डिस्टर्ब किए दूर से आनंद ले रहा था…
तो बताएं मित्रों आपको ये प्यारी सी घटना कैसी लगी …?

चिड़िया की चाय की चाहत पूरी हो ही गई!

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